#गांधीगिरी
एक दिन बैठने की जगह को लेकर क्लास के एक लड़के से झगड़ा हो गया छुट्टी के बाद सुनसान रास्ते पर उसने अपने साथियों के साथ मुझे घेर लिया कि तभी उसकी बहन आ गई । उसने डाँट कर कहा क्या यही पढ़ने जाते हो ? तब वे चले गए लेकिन धमकी दे गए कि कल फिर मिलेंगें । उसकी बहन ने कहा मुझे पता है तुम्हारी भी गलती होगी झगड़ा ऐसे ही नही होता और यह समस्या हल भी नही है। पढ़ाई करो मिलजुल कर रहो , अब घर जाओ और मेरी बात याद रखना ।
अगले दिन उन लोगों ने मुझे फिर घेरा लेकिन मेरे दोस्त साथ थे । मैंने कहा कल तुम्हारी दीदी समझाया , मैं तो समझ गया कि बेवजह का झगड़ा है । यदि तुम्हे चोट लगेगी तो उन्हें दुःख होगा मैं ऐसा नही चाहता । मेरी बात उनको समझ आ गई और झगड़ा टल गया जो फिर कभी नही हुआ । इस तरह उस अजनबी बहन की गांधीगिरी ने मुझे अहिंसावादी बना दिया ।