अगर आनंद ही पाना है तो दो शब्दो में भी मिल जाता है।
जो *प्राप्त* है, वही *प्रर्याप्त* है।
ईसी मे ही सुख *बेहिसाब* है।
और
अगर एक ही शब्द में समझना है तो कबीर ने कहा है।
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया नहीं कोई।
ढाई अक्षर *प्रेम* का पढ़े सो पंडित होय।
*भवतू सब्ब मंगलम*
*सुबह का वंदन स्विकार करे*
शुभ प्रभात जय श्री राधा माधव आपका दीन मंगलमय रहे। ??