Hindi Quote in Story by उदिता मिश्र

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मेरी किटी
मेरी किटी का नियम था कि दिन में एक बार मेरे घर का चक्कर वह जरूर लगाती। और मैं भी उसके आने का इंतजार करती और उसके लिए कभी सादा दूध दूध रोटी दूध ब्रेड आदि रख देती। किटी भी आकर वह खाना बड़े मजे से खाती और सारा दूध रोटी दूध ब्रेड चटकर जाती कटोरा बिल्कुल साफ कर प्यार से मुझे देखती और पूंछ हिलाती कुछ देर वहीं चलती ।
फिर अपने शिकार के लिए चली जाती जब मेरे घर की दीवार पर वह चलती। तब मुझे लगता यह वह सच में कैटवॉक कर रही है ।इसीलिए मैंने उसका नाम किटी रखा था किटी बेहद खूबसूरत सफेद रंग की उस पर लाल लाल आंखें उसके शरीर पर पीले चकत्ते देखने में बहुत सुंदर लगते
एक बार रात के समय बिल्ली की आवाज सुनाई दी तब मैंने इधर उधर जाकर देखा तो मैंने पाया कि कोने में एक डिब्बे में किटी उसके चार पांच बच्चों के साथ बैठी थी । मैंने प्यार से उसे पुकारा तो उसने म्याऊं कहकर पुकारा और चुपचाप वहीं बैठी रही। मैंने ले जाकर उसके पास एक कटोरा दूध रख दिया जो कुछ देर बाद किटी और उसके बच्चों ने पी लिया। अब बिल्ली जल्दी ही शिकार पर जाकर आ जाती , कभी चूहा और कभी कुछ और छोटा जानवर अपने बच्चों के खाने के लिए ले आती ।जब बिल्ली शिकार के लिए बच्चों को छोड़कर जाती तब मैं उसके बच्चों के साथ खेलती और बिल्ले से उन्हें बचाती और जैसे ही किटी वापस आती मैं अंदर भाग जाती।
धीरे-धीरे किट्टी के बच्चे बड़े होने लगे ।किटी उन्हें मुंह में पकड़ कर बाहर लाती कूदना चलना सिखाती । घात लगाकर शिकार पकड़ना सिखाती ।पेड़ पर चढ़ना सिखाती । जब कोई बच्चा पेड़ के ऊपर से नीचे वापस नहीं आ पाता तो किटी उसे अपने मुंह में पकड़ कर वापस नीचे ले आती। इस तरह किटी ने अपने बच्चों को दौड़ना भागना पेड़ पर चढ़ना सब कुछ सिखा दिया था मुझे बैठकर यह सब देखने में बहुत मजा आती थी। अब किटी के बच्चे बड़े हो गए और सभी ने अपनी-अपनी राह पकड़ ली पर किटी का रोज आकर दूध पीना ब्रेड दूध, दूध रोटी खाने का सिलसिला यूं ही जारी रहा ।

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Hindi Story by उदिता मिश्र : 111262863
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