फ़क़त साँस भरना मंज़ूर नहीं
मुझे ऐसे मरना मंज़ूर नहीं
इश्क़ करना है तो मिल के करो
अकेले करना मंज़ूर नहीं
निगाहों में न बसना मंज़ूर है
निगाहों से उतरना मंज़ूर नहीं
मुद्दत लगी है संवरने में मुझको
मुझे फिर बिखरना मंज़ूर नहीं
मंज़ूर है उड़ उड़ के गिरना
परों को कतरना मंज़ूर नहीं
मंज़ूर है अपनी शर्तों पे सबकुछ
मुझे कुछ भी वरना मंज़ूर नहीं
MD....