मुझ पर ये कैसी रब की इनायात हो गयी
गुज़रा जिधर से फूलों की बरसात हो गयी
क़िस्मत की दोस्त मुझपे इनायत तो देख ले
मुद्दत के बाद उनसे मुलाकात हो गयी।
बातों में उनकी मुझको पता ही नहीं चला
कब दिन ढला था और कहाँ रात हो गयी।
आते ही उनके बज़्म का मंज़र बदल गया
लगता है जैसे कोई करामात हो गयी
हासिल देव तुझको ये साग़र का फ़ैज़ है
तूने ग़ज़ल कही ये बड़ी बात हो गयी।