सुदंर कविता ..
हरेक दिल में महकती कोई फूलवारी हैं ।
हरेक दिल में सुलगती कोई चिंगारी हैं ।।
हरेक दिल में तड़पती कोई दिलदारी हैं ।
हरेक दिल में चहकती कोई किलकारी हैं ।।
हरेक दिल में अदाएं है अदाकारी हैं ।
हरेक दिल में करारों की बेकरारी हैं ।।
हरेक दिल में सुर है लय है चित्रकारी हैं ।
हरेक दिल में कुछ अजीब सी फनकारी हैं ।।
हरेक दिल में कोई शक्ति अहंकारी हैं ।
हरेक दिल में थोडी सी मक्कारी हैं ।।
दिल में सब कुछ है ,मगर बात मजेदारी हैं ।
सामने खुल के कोई कभी नहीं आता हैं ।।
कोई तो बात है जिसकी की परदादारी हैं ।
हरेक दिल में महकती कोई फूलवारी हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला जिला डूंगरपुर ,राजस्थान
हाल .अमदाबाद ,गुजरात ।।