~1 नारी 100 पे भारी ~
खूबसूरत सी तस्वीर के रंग चुराना तेरा!
ज़ुर्रियोवाली शक्ल गँवारा नहीं, ये न जताना तेरा!!
36-32-36 कमसीन काया के तलब्दार ओ नौजवां!
बेडौल सी तोंद को तेरे वैसे औ' वहाँ छुपाना तेरा,
कर निग़ाहों से बयां आशिक़ी तेरी सरजमीं पर क़भी,
गलतियों की दुआओं का दम न भर वर्ना, उलझ जाएगा फ़िज़ा में ज़र्रा ज़र्रा ज़िक़्र तेरा!!
नारी हूँ, शक्ति हूँ, हिन्दुस्तान की बेटी हूँ!
उलझना ना मुझसे ये कहकर कि, *छोटे कपडो वाली ने, खुले बालों वालीने, नखराळी नैनों वालीने* था उकसाया क़भी क़भी हम मर्दों को...
-- झुलसोगे अपनी ही लौ में दामन अगर बदनीयती से छुआ जो क़भी...
-- मर्दानगी पर अपने नाज़ करने वालों, दफ़्न होगा ग़ुरूर बिन नारी के संसार चलाना तेरा!!
हलक़ में अटकी रहेंगी तुम्हारें ही दुश्मन की बददुआओं वाली ज़ुबाँ,
जो सरजमीं हिन्दुस्तान की मलिन करने की सोची तो, सरकलम करेगा हर हिंदुस्तानी तेरा!!
!! जय हिन्द, जय भारत!!
~मन की तरंग~