हर नग़में में मिलती रही तेरी आवाज़ मुझे,
एक तेरा ही नग़मा सुनाता रहा हर साज़ मुझे।
मोहब्बत की ख्वाहिश रही शाम-ओ-सहर मुझे,
मोहब्बत के नगमों से करना है आगाज़ मुझे।
तेरी यादों की बारिश में भीग जाना है मुझे,
संग तेरे चलने से मिलती है परवाज़ मुझे।
मेरी ज़िन्दगी सताती रही तेरे ही नाम से मुझे,
तेरे नग़में से आता जीने का अंदाज़ मुझे।
जो हर किसी की चाहत रही उसने चाहा मुझे,
"पागल" ता-उम्र रहेगा मोहब्बत पर नाज़ मुझे।
✍?"पागल"✍?