मुखौटा
चलो आज लगाते हैं मुखौटों की दुकान
अजीब अजीब चेहरे, पर शायद हम इनसे नहीं अंजान••
•••••••
इन मुखौटों में कहीं आपकी तिजारत का रंग न मिल जाए
ध्यान रखिए कहीं इसमें आपकी औकात न घुल जाए••••
••••••••••••
चलो आज लगाते हैं मुखौटों की दुकान•••••
••••••••••
ये चेहरे लगते हैं बड़े गमगीन, पर ये अंदर से बड़े हैं हसीन
ये छुपा रूस्तम सा जो चेहरा दिखता है,इसके रंग है हसीन•••••••••••••
ये जो गंभीरता लिए चेहरा है, बस इसपर ऊपर से पहरा है
बस देखते जाओ साहब, इसमें छिपा है राज गहरा••••••••••••••
चलो आज लगाते हैं मुखौटों की दुकान••••••
••••••••
नीचे की पंक्ति में सजाया गया है जो मुखौटा
वो खुश रहने का नाटक बखूबी करता है पर उसपर दुखों का है पहरा••••••••••
अजी साहब अलग अलग मुखौटें हैं आप इन्हें देखकर घबराइये नहीं••••
कहिए किस मुखौटे की है आपको दरकार? कौन सा मुखौटा आपको परोसुं सरकार•••?
किस मुखौटे को आप ओढ़ेंगे, किसको बिछाएंगे
अजी साहब, बचना बहुत मुश्किल है इन बनावटी दुनिया से बचकर कहाँ जाएंगे•••••
••••••• डॉ रीना