जब पहली बार दिल्ली ट्रेन में चढ़ा।
सहयात्रियों से पूछने लगा, *"महेन्द्रगढ़" कब आएगा ?
मुझे उतरना है। "*
सहयात्रियों ने बताया, *" भाई, ये गाड़ी दिल्ली से जोधपुर जा रही फास्ट ट्रेन है।
महेन्द्रगढ़ से गुजरेगी मगर रुकेगी नहीं। "
मैं घबरा गया।
सहयात्रियों ने समझाया, " घबराओ नहीं महेन्द्रगढ़ में ये ट्रेन रोज स्लो हो जाती है। तुम एक काम करो, महेन्द्रगढ़ में जैसे ही ट्रेन स्लो हो ,
तो तुम दौड़ते हुए प्लेटफॉर्म पर उतरना और फिर बिना रुके थोड़ी दूर तक, ट्रेन जिस दिशा में जा रही है, उसी दिशा में दौड़ते रहना। इससे तुम गिरोगे नहीं।
महेन्द्रगढ़ आने से पहले सहयात्रियों ने मुझे गेट पर खड़ा कर दिया। महेन्द्रगढ़ आते ही सिखाए अनुसार मैं प्लेटफार्म पर कूदा और कुछ अधिक ही तेजी से दौड़ गया। इतना तेज दौड़ा कि अगले कोच तक जा पहुँचा। उस दुसरे कोच के यात्रियों में से, किसी ने मेरा हाथ पकड़ा तो किसी ने शर्ट पकड़ी और मुझे खींचकर ट्रेन में चढ़ा लिया। ट्रेन फिर गति पकड़ चुकी थी। सहयात्री मुझ से कहने लगे,
भाई, तेरा नसीब अच्छा है जो, ये गाड़ी तुझे मिल गई। ये फास्ट ट्रेन है, "महेन्द्रगढ़" में तो रुकती ही नहीं । "
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