Hindi Quote in Poem by Armin Dutia Motashaw

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घायल

एक थी नाज़ुक मीठी हसीन चुलबुली लड़की।


मां कि थी वोह लाडली, पिता की थी वो, बेटे जैसी बढ़की ।


दिन एक, जा रही थी संगीत सीखने लड़को ने घेरा, तो छाती उसकी धड़की


संगीत के सूरो की, गीतों की थी वो कायल


टूट गया था उसका तन मन, लूटी अस्मत, तोड़ दी पायल


उसकी रूह कांप रही थी;  आज हो गई थी अनेक तरह से घायल ।


आंखो में थी एक भयानक दहेश्त, मन में थी आग, एक भड़कता हुआ तूफ़ान ।


जैसे होता है हरदम, आज भी, हार गई अच्छाई; जीत गया एक शैतान


संग उसके, रो रहा था आसमान, पर न जाने क्यों चुप था भगवान !!


खुद ब खुद बनते नहीं कपूत, 

 माता पिता कि परवरिश बनाती है उन्हें कपूत


गुज़ारिश है मेरी हर मात पिता से, बनाईए बेटियों को सक्षम, मजबूत।


और बेटो को सिखाइए, हर औरत की इज्जत करना, बनाइए उन्हें नेक सपूत।


Armin Dutia Motashaw

Hindi Poem by Armin Dutia Motashaw : 111165540
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