घर में जिस तरह व्यवस्था की गई है कि
? पैसा कोई कमाए कर लाए
?खाना कोई दुजा बनाए
?बच्चों का ध्यान कोई और रखें वगैरा-वगैरा
बस उसी तरह हर कोई काम किया जाता है उसे जबरन करवाया नहीं जाता जब जबरन करवाने जाते हैं तब तकलीफ होती है क्योंकि एक का काम दूसरा कर ही पाए यह जरूरी नहीं | खुद का काम दूसरे पर थोप दे या जबरन करवाएं वहीं से गड़बड़ी शुरू होती है |
? जैसे कि परिवार के एक ही सदस्य को सत्संग में ज्यादा रुचि है तो वह घर पर सत्संग की ही चर्चा करते रहते हैं और दूसरों को भी कहते हैं कि जाना चाहिए अच्छा है अच्छा है पर वह अपने तक ही सीमित रखें तो ज्यादा बहस बाजी नहीं होती जिसे पसंद आता है वो खुद-ब-खुद ही सत्संग में आने को शामिल हो जाता है | ...ॐD