#KAVYOTSAV -2
यूं खट्टी मीठी तकरारों के बीच
ये पनपते रिश्ते,
एहसासों की शह में ये
हर रोज बरसते,
फिर इन बरसातों में यूं
मिलना तेरा मेरा
जैसे रोशन हो जाए
कोई विरांन अंधेरा
यूं तो मुझको अब अच्छा लगता है
ये गुमनाम अंधेरा
पर अब तुमसे मिलके मुझको भाया है
ये नया सवेरा,
लेकिन इस सवेरे के बाद
जो काले बादल छाएंगे
फिर तुमको मुझसे
जाने कितना दूर ले जाएंगे
शायद फिर इस उजालों में
हम ना रह पाएंगे
और अंधेरे से तो निकले ही थे
और कहां जाएंगे..