शांत उनका स्वभाव था,
शांति से करते थे बात।
चेहरे पर शालीनता,
ऐसे थे रबिन्द्र नाथ।।
इक महान कवि थे,
शांति के थे दूत।
आपकी "गीतांजलि" को गुरूवर,
कोई कैसे जाएगा भूल।।
बांग्ला के आप उद्धारक,
हिंदी साहित्य के सरताज।
आपने ही तो लिख डाला था,
"जन गण मन" का राग।।
साहित्य प्रेम आप सरीखा,
पाया न किसी के पास।
हिन्दुस्तान हो या बांग्लादेश,
दोनों का लिखा राष्ट्रगान।।
आप "शांति निकेतन" के स्थापक,
आप सा न कोई है महान।
आप से ही तो सीख कर,
लिख रहा हूँ मैं सुबह और शाम।।
आज 09 मई को गुरूदेव का जन्मदिन है तो उन्हें कोटि कोटि नमन।।