इश्क़, मुहब्बत ,रिश्ते ,नाते
लगते हैं कितने प्यारे
किस्से होते इनके उतने ही न्यारे
आशिक अब हर गली में खड़ा है
प्यार के पीछे हर कोई पड़ा हैं
रिश्ता उनका फिर भी न चला है
देखे कितने रिश्ते बनते
कुछ ही क्षण में उनको मिटते
खेल तमाशा प्यार का हैं बना रखा
रिश्तों को अब हैं मिटा रखा
छोरा छोरी मिलते हैं
फिर इनके प्यार के किस्से बनते हैं
चार दिन ये दुनिया अच्छी लगती
मारे मारे ये फिर फिरते हैं
चक्कर लगते अब कोर्ट कचहरी के
बँटते हैं आदे आदे बच्चे
होते इनके धागे इतने कच्चे
बात अब.तलाक पर पहुंच जाती
दुनिया हैं ये इतनी न्यारी
गलतफैमियाँ दरार बढाती हैं
इनको दूर कराती हैं
ये हैं पूरी आज की कहानी
देखो मुहबबत बिकती है बाजार में
होती हैं जिसमें मनमानी
#KAVYOTSAV