#शायरी
वक़्त ने खेले खेल निराले
अपनो के लिए हो गये बिगाने
जख्म दिलो के ना दिखे कभी
प्यार है कितना ना जता पाए कभी
समझा उसने जब जब बेबफा
काश कि देखता कभी वादे बफ़ा
उलझन दिलो की ना जाने कब सुलझे
बेरुखी पे उसकी अब ये दम निकले
धड़कन दिल की सेहम सी गयी
जब जब दिल को याद आती गयी
हैं नाजुक बडा ही बो हर एक पल
आये जब सामने संग बिताये बो पल
क्या कहे क्यूँ हो गये हैं खफा
प्यार ने दिलो को क्यूँ दी है ये सजा
काश कभी तो बो पल भी आये
बाहो मे उसकी ये जान जाये
माना कि है ये मेरी खता
दूर कर उनको दी है खुद को ही सजा
दिल मे हा लबो पर ना लिये रहे
कुछ एसे ही जिन्दगी जीते रहे
मोका मिला गर तो मिलेगे फ़िर से
हाल दिलो का सुनेगे फ़िर से
कहेंगे उसको आ देखले मजबूरी
बन्धन में बन्धी है चाहत ये तेरी
ना कर एसे चाहत को रुसवा
इस दिल पर है बस तेरा ही रुतवा
प्यार है इतना कहा जाए ना
दर्द ये दिल का सहा जाये ना
ठोकर खाकर भी सम्भल गये हम
हद तब हुयी जब टूट कर भी जी गये हम
आज भी दिल में ये इक मलाल है
क्यूँ खफा हूँ उससे ये भी इक सबाल है
है क्यूँ ऐसा बो भी परेशान है
कुछ सबालो की लडिया उसके भी पास है
✍ RJ Krishna ✍