चिट्टियो में मैने लिखा उन दो प्यारी बातो को
याद है क्या मिलते थे छुपकर उन दो घड़ियों को
लिखा है मैने उनमे उन प्यारी मुलाकातों को
छाता होते हुए भी भीगे उन दो प्यारी यादो को
उनको तो जो भूल गए तुम मिलना घर के बाहर को
चिट्टियो में मैने लिखा हे उन दो प्यारी बातों को
कहती तुम कभी न बिछड़े चाहे जन्म सात लेले
कसमे वादे खाये ऐसे पत्थर पे जैसे लकीर बने
उनका तो क्या जो तोड़ गये तुम कसमे वादों को
चिट्टियो में मैने लिखा हे उन दो प्यारी बातों को
पहली बार का मिलना तो मैं अब तक नही भुला हूं
याद करु जब उन लम्हो को जीवित फिर में होता हूँ
यह तो बता जाते सजा क्या दी तूने मेरी इस ख़ता की
चिट्टियो में मैने लिखा हे उन दो प्यारी बातों को