#kavyotsav
#प्रेम
मै खड़ा रहा...
मैं खड़ा रहा.
चुपचाप इंतजार में..
तुम आओगे किसी सुबह..
सूरज की किरणों से..
बादलों के बीच से..
मैं खड़ा रहा..
चुपचाप इंतजार में..
धूप चढ़ती गई..
नजर थकती गई..
गर्म रेत से मन कसमसाता रहा..
कोई बवंडर उठता जो दिखे..
तुम्हारे आने की आहट सी लगे..
मैं खड़ा रहा..
चुपचाप इंतजार में..
दोपहर भी अब थक गई..
आती शाम को एक आह दे गई..
भीगी आंखों से कहीं उम्मीद ना बह जाए ..
तुम्हारे आने से पहले कहीं अंधेरा ना हो जाए ..
मैंने शुरू कर दिया अपने दिल को जलाना..
रोशन तुम्हारी मुझ तक राह हो जाए..
मैं खड़ा रहा...
चुपचाप इंतजार में..
शाम भी मुझ को निहारती अंधेरा हो गई..
इंतजार जागता रहा बैठा, उम्मीद सो गई..
धू-धू कर मैं यूं ही जलता रहा..
शहर कुछ और रोशन हो कर चलता रहा..
मैं खाक हो गया तेरे मिलने के इंतजार में..
मैं पड़ा रहा...
मैं पड़ा रहा...
चुपचाप इंतजार में.