#KAVYOTSAV - 2
फिर बात करती हूँ
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अभी जख्म गहरे हैं,
फिर बात करती हूँ.
न कुरेद बार बार ,
फिर बात करती हू.
आँखें अभी नम हैं,
दिल में बहुत ग़म हैं ,
दो पल बीतने दे ,
फिर बात करती हूँ.
पात पड़े पीले ,
झरते अँगनाई में,
संध्या के रंग बसे
दिवस के पहुनाई में.
जेठ की दुपहरिया सी ,
लू के झकोरे हैं ,
प्यासे लवों पर ,
सूखे सकोरे हैं.
मन बारिश भीगने दे
फिर प्यार करती हूँ.
अभी जख्म गहरे हैं ,
आँसुओं के पहरे हैं
फिर बात करती हूँ.
आँधी तूफान है ,
लहरें हैं वेगवान
तटबंध मिट्टी के ,
मजबूत करने दे.
फिर बात करती हूँ.
अभी जख्म गहरे हैं,
फिर बात करती हूँ.
धागे कमजोर थे,
उलझे पुरजोर थे.
गाँठें हैं उलझीं सीं,
एक बार सुलझने दे ,
फिर बात करती हूँ.
अभी जख्म गहरे हैं ,
आँसुओं के पहरे हैं
फिर बात करती हूँ .
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कवियित्री, रचनाकार,
©®शोभा शर्मा
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