#kavyotsav2
NAZM -"यादों के दिन"
वो बग़ैर शोर किए तेरा ख़्वाबों में आना,
वो सारा दिन तख़ईल में वलवले के साये,
वो तेरी ज़ुल्फ़ों से निकली हुयी ख़ुश्बूओं की चिंगारियाँ,
वो साँसों के जलते हुये मरहले के साये,
हर पल खोता हुआ मंज़र का नशात,
हर सम्त डुबती हुयी फ़ज़ा की रानाई,
रफ़्ता रफ़्ता बढ़ती हुयी दिल की अफ़सुर्दगी,
ठहर ठहर आती हुयी उफ़क़ से तन्हाई।
वो मुसलसल खोती हुयी शफ़क़ की रंगत,
वो आसमाँ में पुरसोज़ घुलती हुयी रात,
वो गिरां-बार होती हुयी नज़रों की शुआएँ,
वो ज़ुल्मतों के गिरदाब में जाती हुयी हयात।
वो तेरी यादों के हंगामें वो शाम की नुमाइश,
वो भीगी-भीगी सी पलकें वो रेज़ा-रेज़ा सी ख़्वाहिश,
वो झुकती हुयी चमन की बे-नूर सी कलियाँ,
वो रूठी हुयी फ़ज़ाएँ वो जज़ीरों की रंजिश।
Written by-NISHANT"