सुनो प्रिय
जब मैं तुमसे बात करती हूँ
तब जी को करार आ जाता है सकूँ भर जाता है
मन में बेचैनी न जाने कहाँ चली जाती है
स्वांस को स्वांस आ जाती है
दर्द गुम जाता है
मानो खुशी की लहर
दौड़ने लगी है
और जीने की आस फिर से बल्बती हो गयी
सुनो प्रिय तुमसे ही मेरा जीवन है
मेरी जीवन जोत तुम ही हो
तुमसे प्यारा कोई भी नहीं
तुम मेरे हो
सिर्फ चाहती हूँ तुम्हें और
कोई चाहत नहीं हैं मेरी
ख़ुश रहो तुम खुश होती मैं
मेरे दर्द की दवा तेरी खुशी के
सिवा्य कुछ भी नहीं मेरीll
असीम