***कहा विवेकानंद ने.....***
जीवन सफल बनाना है यदि ,
कुछ नवीन करना होगा।
पथरीले पथ पर हर पग धर ,
हर संकट हरना होगा।
कहा विवेकानंद ने साथी ,
कठिन साधना फल देती है।
हर कठोर पर्वत सी बाधा ,
प्रतिपल उर को बल देती है।
नेह नीर का बनकर झरना ,
झर झर झर झरना होगा।
पथरीले पथ पर हर पग धर ,
हर संकट हरना होगा।
तुम खुद ही हो भाग्य विधाता ,
कर सत्कर्म भाग्य तुम लिखना।
हस्त लकीरों के चक्कर में ,
कर्त्तव्यों से विमुख न दिखना।
स्वाभिमान हर बाल युवा में ,
कूट कूट भरना होगा।
पथरीले पथ पर हर पग धर ,
हर संकट हरना होगा।
करना होगा नया सृजन कर ,
उपहासों से तुम्हें सामना।
फिर विरोध के बाद पड़ेगा ,
ध्वज स्वीकृति का तुम्हें थामना।
अनगिन कंटक भरे कष्ट से ,
किंचित ना डरना होगा।
पथरीले पथ पर हर पग धर ,
हर संकट हरना होगा।
- डॉ० देशबन्धु ‘शाहजहाँपुरी’
आनंदपुरम कॉलोनी( बीबीजई चौराहा )
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