राधिका बालकनी में खड़े होकर अपने गीले बालों को सुखा रही थी। कि अचानक उसकी नजर उसके सामने वाली बालकनी में कपड़े सुखाने आई, विमला आंटी के रोते हुए चेहरे पर पड़ी ,उन्हें रोता देख उसे बड़ा गुस्सा आया , अंकल के ऊपर क्योंकि वो जानती थी। कि आंटी के रोने की वजह हर बार की तरह अंकल ही होंगें। कितनी बार मेरी मॉ ने उन्हें समझाया , कि जब अंकल उन्हें गलत बोलते है डॉटते है, तो उन्हें तुरंत जबाब देना चाहिए ना कि चुप रहकर आंसू बहाना चाहिए। क्योंकि उनके रोने का अंकल पर कोई असर नहीं होता । शायद उन्हें आंटी के अॉसुओं में अपनी जीत नजर आती थी, और इस जीत पर उन्हें इतना घमंड हो गया,कि स्वयं को पति परमेश्वर और आंटी को अपने पैर की जूती समझने लगे।और आंटी को रोते देखना अब हमें आम लगने लगा। पर जब भी आंटी को रोते देखती तो मुझे और मॉ दोंनो को बहुत कष्ट होता था। आंटी हमारी सबसे अच्छी पडोंसी थीं।वो बहुत ही सीधी सादी और साफ दिल की औरत थी।उनकी दुनिया उनका परिवार था।वो कहती थी कि वो घर की सुख शांति के लिए ही चुप रहती है उन्हें लगता था कि अंकल बहुत जिद्दी और गुस्सेवाले है ।और वो उनसे बहुत प्यार करती थी, उन्हें लगता कि अगर वो अंकल को जबाव देंगी तो उनका गुस्सा और बढ़ जायेगा। और वो टेंशन में रहेंगे जिससे उनके काम और स्वास्थ्य पर बुरा असर पडे़गा । पर आंटी का ये बलिदान जिसके बारे में भनक तक नहीं थी । उन्हें आंटी बहुत ही मूरख और पागल क्योंकि वो अगर आम को ईमली कहते तो वो मान लेती थी।
तो दोस्तों ऐसी होती है औरत पसंद आये तो लाईक और शेयर कीजिए , और अपने आसपास या खुद में देखिए, क्या आप भी आंटी की तरह है और क्या आंटी सही कर रही है आंटी अपने कर्तव्यों को निभाने में अपने अधिकारों को खोंती जा रही है क्या आपको ये सही लगता है मुझे तो नहीं लगता