कुछ सवाल जो तुमसे करने थे
कुछ जवाब जो तुमसे लेने थे
क्यूं पागल कर दिया, बोलो तो सही
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
दिखाया सपना जन्नत का
क्यूं धरती पर ला पटका है
मैं टूट के चकना चूर हो गयी
जैसे मिट्टी का कोई मटका है।।
मैं भी थी एक नन्ही कली
क्यूं मसल मसल कर कुचल दिया
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
प्यास तो थी हम दोनों की ही
सिर्फ मेरा ही गला क्यूं सूख रहा
तू हूर नहीं तू नूर नहीं, फिर
दिल मेरा तुझे ही क्यूं ढूढ रहा।।
बिरह की आग में झुलसती मैं
क्यूं तड़प रही तिल तिल मरके
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।
अब खतम कहानी तेरी मेरी
जो शुरू किया नहीं कभी तूने
एक छलावा था एक खेल भी था
पर प्यार ही समझा हमेशा मैंने।।
क्यूं खेल की बाजी मुझे समझा
और खेल गये दिल से मेरे
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।