क्या कहूँ दूर-बहुत दूर-मुझे जाना है
ज़िन्दगी तूने...मुझे ज़रा देर से पहचाना है...
इतना भटके हैं कि मंजिल का पता याद नही
अब रास्ते पूछँ रहे हैं कि कहाँ जाना है...
जैसे आवारा सी सड़कों पर...कोई बंजारा
मेरी किस्मत में भी-बस्ती है ना वीराना...
मेरे टूटे हुऐ दिल की तुम...उड़ाओ ना हंसी
मैं हूँ जिस मोड़ पर-तुमको भी वहीं आना है
ज़िन्दगी तूने ज़रा देर से पहचाना है...!!