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सुख भरपूर गया, मांग का सिंदूर गया ,
नन्हे नौनिहालों की लंगोटियां चली गयीं ,
बाप की दबाई गयी , भाई की पढ़ाई गयी ,
छोटी छोटी बेटियों की खुशियां चलीं गयी ,
ऐसा विस्फोट हुआ , जिस्म का पता ही नही ,
पूरे जिस्म की ही , बोटियाँ चली गयीं ,
कहने को तो 'एक' आदमी मरा है साहब,
किन्तु उसके घर की तो , , ,
रोटियाँ चली गयीं , , ,
? शहीदों को नमन ?
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