सुना है आज प्यार वाला दिन है
आज तो हम सारे दिन उसके संग है।
जोधपुर की तंग गलियों में गुम है
एक महीने की सैलरी भी उसके लिए कम है।
कोई भी घर मत बोलना
क्योंकि हम अपने हमदम के संग है।
किसी और की जरूरत नहीं
हमारा तो जन्मो का संगम है।
वहीं तो मेरा एक ? हमदम है।
कवि एन आर ओमप्रकाश हमदम।