"पुराना-नया"
पुरानी फिल्में,पुराना गीत-संगीत, पुराना जीवन,पुराने लोग,पुराने दोस्त,
पुराने रिश्ते,पुराने खत,पुरानी डायरीज़,पुरानी कैसेट्स,पुराने कुछ अजीज कपड़ें,पुराने अखबारों की कुछ कतरनें,पुरानी यादें,पुरानी बातें,कुछ पुरानी आवाजें...
सब कुछ सहेज-सहेज कर रखती हूँ मैं...हाँ,पुराने अखबार पढ़ती हूँ मैं,आदत बुरी है ये भी समझती हूँ और हर साल की शुरुआत से ही इसे बदलने की कोशिश करती हूँ ,पर हर साल नहीं बदल पाती हूँ बहुत कुछ..कि नहीं भूल पाती हूँ मैं बहुत कुछ,शायद भूलना भी नहीं चाहती हूँ..वो पुराना जमाना जो जाने कब का गुजर गया है पर मेरे दिल में ठहर सा गया है कि अच्छा लगता है मुझे अब भी बहुत कुछ पुराना सा कि नया कुछ इतना अच्छा मिलता ही नहीं,पुराने मे पवित्रता थी,शायद थोड़ी सी निश्छलता भी थी,नये में बहुत कुछ है पर जो मेरे दिल को चाहिए वो मासूमियत,वो सादगी,वो पवित्रता नहीं है..शायद इसीलिए चाहकर भी नये से मेरा नाता इतना नहीं जुड़ पाता जितना पुराने से जुड़ा है..नया साल आ चुका है,मैं अभी तक पुराने साल की तस्वीर लगाये बैठी हूँ,सबने पुराने साल को अलविदा कह दिया,
मैं कैसे उस साल का आसानी से साथ छोड़ दूँ,हाथ छोड़ दूँ,जिसने पिछले साल,साल भर मेरा साथ दिया है...
प्रांजल,
29/01/19,12P