अंतिम शाम के आगोश में ये साल है अब जा रहा,
कुछ यादें जोड़कर कुछ छोड़कर है जा रहा।
नए साल की शुरुआत का मदहोशी है छा रहा,
हर सुबह नई शुरुआत हो,साथ हसीन रात हो।
कर रहा हूँ मैं इल्तजा ए खुदा मेरी दुआ कबुल कर,
नये साल में न कोई भूखा रहे न कोई रोता रहे
हर तरफ खुशियाँ ही हो और हर कोई हंसता रहे,
नए साल का आगाज कुछ इस कदर तू सबका कर।