खामोश हो गए क्यों यूं तस्वीर की तरह।
चुभने लगे थे पल, घाव की पीर की तरह।
अब जो कुछ बुरा हुआ है उसे जाने भी दो,
इम्तिहान मत लेना हमारा धीर की तरह।
अमृता शुक्ला
ज़ुबां पर मीठा, मन में धोखा भरा था ।
हमने उन पर कितना भरोसा करा था ।
हम तो नादान थे इसलिए न समझ पाए,
जैसे सावन के अंधे को दिखता हरा था ।
अमृता शुक्ला