Hindi Quote in Story by Anju Kharbanda

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कसक ये बिन बात की - अंजू खरबंदा- 24.11.18

जाने क्या था रेशम के मन में । मुकुल ने कई बार कहा नौकरी करने के लिए पर वह एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देती ।

"रेशम तुम तो जानती ही हो कि एक सैलेरी में घर खर्च बहुत मुश्किल से चलता है । तुम पढ़ी लिखी हुनरमंद लङकी हो । कोई नौकरी ज्वाइन कर लो तो अच्छे से गुजारा हो जाएगा हमारा ।" मुकुल ने कई बार समझानेकी कोशिश की पर क्या मजाल कि रेशम टस से मस हो जाए । थक हार कर मुकुल ने कहना ही छोड़ दिया ।

साल दर साल गुजरते गये । रेशम दो बच्चों की मां बन गई । उनकी परवरिश में वह मगन हो गयी । पढ़ी लिखी तो थी ही । हर काम में भी फुर्तीली थी । फटाफट घर के सारे काम निबटा लेती व ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को देने की कोशिश करती ।

मुकुल भी धीरे-धीरे तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते हुए अच्छी पोस्ट पर पहुँच गया ।

आजकल एडमिन के समय बङे बङे स्कूलों में बच्चे का आई क्यू लेवल टेस्ट तथा माता पिता का इन्टरव्यू भी होता है । देखते ही देखते दोनों बच्चों का एडमिन बढ़िया स्कूलों में हो गया । एक दिन सुबह चाय पीते हुए मुकुल ने रेशम का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा - थैंक्यू रेशम ।

रेशम एकदम से अचकचा गयी - "क्या हुआ मुकुल!!"
"पता है रेशम मुझे तुम पर कई बार बहुत गुस्सा आता था कि जब मुझे फाइनेंशियली स्पोर्ट की बहुत जरूरत थी तुम उस समय हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती थी । मै मन ही मन कुढ़ता रहता था ।"

रेशम आज भी चुप थी हमेशा की तरह ।

मुकुल ने रेशम की आंखों में देखते हुए कहा - "आज जब हमारे बच्चों का एडमिन बढ़िया स्कूलों में हो गया है और दोनों बच्चे हर लिहाज से समझदार हैं तो मैं इस बात को समझा हूँ कि एक घर को सुचारू रूप से चलाने और घर को घर बनाने के लिए पैसों के साथ साथ मां की ममता और तुम्हारे जैसी समझदार व संवेदनशील पत्नी का स्पोर्ट बहुत जरूरी है ।"

रेशम हल्के से मुस्कुराई पर साथ ही साथ उसकी आंखें भर आई - " मुकुल मैं सब समझ और देख रही थी पर एक बात मेरे दिलो दिमाग में घर कर गयी थी कि मेरी तो मां नहीं थी तो मुझे कभी भी मां का प्यार नहीं मिला, मै हमेशा तरसती रही पर मैं अपने बच्चों को मां होते हुए भी कैसे बिन मां का कर देती !!!"

Hindi Story by Anju Kharbanda : 111051923
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