एक पाती मां के नाम ~ अंजू खरबंदा
मां आप वहां कैसी हो । हम सब यहां कुशल मंगल हैं । मैं कई बार आपको सितारों मे ढूंढने की कोशिश करती हूं कि शायद आप भी मुझे देख रही हो ।
आपके जाने से बहुत कुछ पल भर में बदल गया । वक्त के साथ साथ हम बड़े तो हो गये पर हर वक्त आपकी कमी महसूस की। चाहे वह दुख की घड़ी हो या परेशानी की। - हर पल आप याद आये ।
मां जब मेरी शादी हुई तो आपको बहुत बहुत मिस किया । माएं कैसे तिनका तिनका जोड़ती है अपने बच्चों के लिये पर हमें तो खुद ही सब जोड़ना पडा । शादी की शॉपिंग से लेकर रिश्तेदारों तक - कभी कभी हिम्मत हारने लगती तो लगता आप मेरे साथ खड़े हो । आपको साथ पाकर खोई हिम्मत फिर वापिस आ जाती ।
मां धीरे धीरे हम भाई बहन तो स्कूल कालेज आफिस घर परिवार मे बिजी हो गये पर सबसे ज्यादा अकेले हो गये पापा । मैंने खुद उन्हें कई बार रातों को रोते देखा है । उन्हें रोता देख खुद भी खूब रोई । उम्र के इस पड़ाव पर तो उन्हें आपकी बहुत जरुरत थी ।
मां ! खुद मां बनकर जाना कि मां का प्यार क्या होता है । दोनों बच्चे जब लाड़ करते है और गलबहियां डालते है तो आप बहुत बहुत याद आते हो ।
आप बिल्कुल चिंता न करें मां । हम भाई बहन सब बहुत अच्छे से सैटल हो गये है । दोनों भाभियां बहुत अच्छी है । घर में बच्चों की रौनक से घर महका रहता है । दोनो भाई हम बहनों को बहुत मान सम्मान देते हैं ।
मां अब मेरी क्लास का समय हो रहा है, शेष अगले पत्र में ।
आपकी दुलारी बेटी
अंजू