आस बंधाती हर आहट,जीवन की मुस्कान लिए,
गुंजित होता नाम हृदय में एक भविष्य का साथ लिए
पुलकित प्रेम रीत करने बन परिभाषा प्रीत चली आई
ये पूजा है ये वंदन है, भावों में बसा यह अर्चन है
हंसकर सहती ये कष्ट बहुत पर, ऐसा सुंदर बंधन है
धरा - गगन ,सूरज से किरन , मिलती है, मिलती आई।।
घिर आते सपनों के बादल, भाव तरलता ले आती
कोमल स्पर्शों से,उर सिंधु का हो जाता है मेल यहां,
तब लहर लहर चंचल होकर मौन निमंत्रण दे आई।।