तेरी यादो के साथ साल बीत रहा है,
क्या कहे,कैसे मेरा ये हाल बीत रहा है,
हम,हम ही हम में जी रहे है सनम,
हर बार हमसे तेरा ख्याल जीत रहा है,
अकेले है ,अकेले ही जिए जा रहे है,
ना कोई मितवा ना कोई मीत रहा है,
फिर अनुत्तर हो, खामोश है परिंदा,
हर बार उससे शिकार ए जाल जीत रहा है,
यूँ तो हजारो खुशियों की बरसात है जहाँ में,
पर कैसे ख्वाबो में,ये हाल बीत रहा है
जवाब तो है अल्फाजो का मगर,
बिना किसी जवाब के सवाल बीत रहा है ।