इंकार है मुझे,
पिंजरे से जिंदगी से,
रुकी हुई हंसी से,
बंधन के बेड़ियों से,
घूंघट की उदासी से,
क्यों जीने नहीं देते,
क्यों खुलकर हंसने नहीं देते,
क्यों ना चाहे जो करूं मैं,
क्यों सब खोती ही रहूं मैं,
क्यों पाने नहीं देते,
हर चीज है परायी,
क्यो अपनाने नहीं देते ,
चाहती हूं मैं भी जीना ,
क्यों मरने भी नहीं देते ,
एक खलिश सी है जीवन,
चारों ओर एक आवरण,
आवरण के सम्मुख,
खुशी आने नहीं देते,
प्रेम प्रसन्नता देती ही रही मैं ,
प्रतिशोध द्वेष अभाव ही क्यो पाऊँ,
दीक्षा नहीं चाहूं मैं,
अधिकार क्यों न देते ,
उड़ना नील गगन में,
हंसू बिना रुके मैं,
तोड़ू ये बेड़ियां मैं,
विचरण करूं फलक में,
जीना चाहती हूं ,
पाना चाहती हो,
प्रतिकार नहीं,
अधिकार चाहती हूं।।