#kavyotsav
कविता (रिश्ते)एक मासूम की आवाज
माँ मेरे चेहरे की उदासी तुझको ना दिख पाती है ..
मुझे छोड़ के क्रेच में तू क्यों दफ्तर जाती है ..
तेरे आँचल में सोने को दिन भर में मचलता हूँ
क्या तुझको भी दिन भर में याद कभी में आता हूँ ...
पापा के पैसों में गुज़ारा करना मुझको तू सिखलाती
जन्म दिया गर मुझको तूने ममता भी तो लुटाती ...
दादा दादी को यहाँ बुलाना तुझको बहुत अखरता है
मुझे छोड़ गैरों के हाथों क्या तेरा मन लगता है ....
आज़ादी की चाहत में क्यों तूने मुझको कैद किया ?
अपनी बाहों के घेरे से क्यों मुझको आज़ाद किया ...
अपनी जिम्मेदारी को क्यों तू निभाना भूल गयी ..
मॉडर्न बनने की चाहत में क्यों माँ की ममता भूल गयी ....
अन्तिमा सिंह (मौलिक रचना)