# kavyotsav
देखो चेहरे उतरे से लगते हैं ,
कुछ ख्वाब अधूरे लगते हैं ।
जो आए थे इस महफिल में,
उनसे भी खतरे लगते हैं ।
हंस - हंस कर जो बातें करते हैं ,
जख्म उनके भी गहरे लगते हैं ।
कल तक जो अपने से लगते थे,
उनके चेहरे बदले से लगते हैं ।
शीशे से ये नाजुक रिश्ते हैं ,
टूटे तो जख्म गहरे लगते हैं ।