वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है,
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है,
झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है। आइना है
उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है, वो है पागल,
जो दिल को झुटा बतलाती है, लगती है प्यारी,
जब खुद ही वो शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है। कहता है
जमाना कि, वो तो पागल है, वे-वजह, जब-जब वो मुस्कुराती है,
जमाने को क्या पता, कि वो मुझसे क्यों शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
जब आँखें मेरी मदहोश चेहरे से उसके, मिलकर आती हैं,
काश वो समझ पाती कि, कितना मुझको वो तड़पती हैं,
खो गया गया हूँ मुझसे मै, न नींद मुझको अब आती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।….