"अधूरा सा एहसास"
तुम मिले तो जैसे हर दुआ मुकम्मल हो गई,
वीरान सी इस ज़िंदगी में खुशियों की हलचल हो गई।
न जाने क्या जादू है तुम्हारी इन खामोश नज़रों में,
कि तुम्हें देखते ही मेरी हर मुश्किल सरल हो गई।
कभी सुबह की पहली किरण सा ताज़ा है तुम्हारा एहसास,
कभी रात की चांदनी सा सुकून भरा तुम्हारा साथ।
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरी हर एक बात में,
जैसे तुम ही बसे हो मेरी धड़कन और मेरी हर सांस में।
मोहब्बत में बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी,
कि हर जन्म में मुझे ये पनाह मिले तुम्हारी।
दुनिया की इस भीड़ में मुझे और कुछ न चाहिए,
बस उम्र भर के लिए मुझे ये बाहें मिले तुम्हारी।