जिंदगी तू भी है एक किताब सी
हमेशा लगती तू एक अनसुलझा सवाल सी।
एक पन्ने पर सुख तेरे,दूजे पे दुख लिखा है
एक पन्ना हंसाता तेरा,दूजा आंखें नम कर जाता है ।
कहीं लिखी इबारत इश्क की,कहीं गम जुदाई का
कहीं सबक दुनियादारी का,कहीं भेद अपने पराए का।
हर पल रंग बदलती तू, नित नए रूप धरती तू
कभी मां की गोद लगती तू,कभी पिता सी छाया बनती तू।
कोई भेद तेरा समझ ना पाया,अजब है जिंदगी तेरी माया
यहां उसने ही सच्चा सुख पाया,जिसको तूने हंस के गले लगाया।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati