🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
वो लौट आया है अश्क लेकर मगर
हम तो मर चुके थे,
उसे खबर ही नहीं हुई कि हम कब
के गुज़र चुके थे,
तलाशता है वो अब पुराने, निशान
मेरे मकान पर,
वो छत कहाँ से बचा के रखता
दीवार-ओ-दर गिर चुके थे,
उसे लगा कि वो हाथ थामेगा और
मैं फिर से मुस्कुराऊँगा,
वो धूप लेकर तब आया छत पर
जब साए ढल चुके थे,
अजीब जि़द है ये उसकी देखो
कि प्यास बुझाएगा मेरी अब,
घड़ा तो उसने भरा है लेकिन
दरिया ही सूख चुके थे,
कहाँ की वफ़ा और कैसा रंज
अब ये सब फ़िज़ूल बातें हैं,
वो ख़त वो अब पढ़ रहा है बैठ
कर, जिनके हर्फ़ मिट चुके थे...🔥
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#Zakhmi -E-Zubani..✍🏼
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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