कहाँ खो गई?
तुझे ढूँढूँ मैं, पर तू मिले नहीं...
सारे घर में आगे-पीछे,
मैं ढूँढूँ तुझे यहाँ-कहीं...
पर तू तो... पर तू तो... कहाँ खो गई?
इतनी ज़्यादा तू... खुद में क्यों खो गई?
मैंने रोका था बहुत, पर तू तो रुकी नहीं...
(आई... आई... आई...)
ऐसे अचानक तू कैसे बदल गई?
जैसे कोई पराई हो, वैसी तू तो हो गई...
(आई... आई... आई...)
इतनी ज़्यादा तू... खुद में क्यों खो गई?
मोहब्बत की wo राह अब सूनी हो गई...
(आई... आई... आई...)
मैं यहीं रह गया और तू चली गई...
अल्फ़ाज़ खत्म हुए और बात पूरी हो गई...
(आई... आई... आई...)
भीगी आँखों से देखूँ, पर तू दिखती नहीं...
तू तो गई... तू तो गई...
आई... आई... आई...
जाने में...
कहाँ खो गई?