Hindi Quote in Thought by Prabhjot Singh Nagra

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इलेक्ट्रॉन–नाभिक स्थिरता सिद्धांत

(सूत्रों के आधार पर पूर्ण व्याख्या)

1. प्रस्तावना

परमाणु के अंदर नाभिक (nucleus) धनात्मक आवेश (+Z) रखता है और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश (−e) रखते हैं। भौतिकी का मुख्य प्रश्न यह है कि इतने अधिक आकर्षण बल के बावजूद इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर क्यों नहीं जाता? इस सिद्धांत में इसका उत्तर केवल सूत्रों (सूत्‍रों) के माध्यम से दिया गया है।

2. नाभिक–इलेक्ट्रॉन के बीच बल (Fi)

नाभिक द्वारा i-th इलेक्ट्रॉन पर लगाया गया आकर्षण बल Coulomb नियम से दिया जाता है:



जहाँ:

Fi = i-th इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला आकर्षण बल

K = Coulomb स्थिरांक

Z = नाभिक का आवेश (protons की संख्या)

e = इलेक्ट्रॉन का आवेश

rᵢ = i-th इलेक्ट्रॉन की नाभिक से दूरी

👉 यह बल हमेशा नाभिक की ओर होता है।

3. दूरी का प्रभाव (rᵢ का रोल)

सूत्र से स्पष्ट है:



अर्थात:

यदि rᵢ कम होता है → Fi बहुत अधिक बढ़ जाता है

यदि rᵢ अधिक होता है → Fi कम हो जाता है

यदि केवल यही बल कार्य करता, तो इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जाना चाहिए था।

4. इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बल (Fᵢⱼ)

परमाणु में एक से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन दूसरे इलेक्ट्रॉन को प्रतिकर्षित करता है:



जहाँ:

Fᵢⱼ = i-th और j-th इलेक्ट्रॉन के बीच प्रतिकर्षण बल

rᵢⱼ = दोनों इलेक्ट्रॉनों के बीच दूरी

j ≠ i = इलेक्ट्रॉन स्वयं अपने ऊपर बल नहीं लगाता

👉 यह बल नाभिक से बाहर की दिशा में कार्य करता है।

5. बलों का संतुलन (Force Balance)

i-th इलेक्ट्रॉन पर दो मुख्य प्रभाव होते हैं:

(A) अंदर की ओर बल



(B) बाहर की ओर प्रभाव

इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण

इलेक्ट्रॉन की गति से उत्पन्न प्रभाव

जब:



तब इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दूरी (rᵢ) पर स्थिर हो जाता है।

6. इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरता?

यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बहुत पास जाए:

rᵢ बहुत कम हो जाता है

Fi अत्यधिक बढ़ जाता है

ऊर्जा न्यूनतम से कम होने लगती है (जो संभव नहीं)

इसलिए प्रकृति एक न्यूनतम दूरी बनाए रखती है जहाँ बल संतुलित रहते हैं।

7. सिद्धांत का निष्कर्ष

इस सिद्धांत के अनुसार:

नाभिक इलेक्ट्रॉन को Fi बल से अपनी ओर खींचता है।

इलेक्ट्रॉन आपस में Fᵢⱼ बल से एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।

दूरी घटने पर आकर्षण बढ़ता है, पर बाहर की ओर प्रभाव भी बढ़ता है।

एक विशेष दूरी पर ये सभी प्रभाव संतुलित हो जाते हैं।

👉 इसी संतुलन के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरता और परमाणु स्थिर रहता है।

8. ऊर्जा की दृष्टि से व्याख्या (Energy Point of View)

इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा दो भागों से मिलकर बनती है:

(A) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच स्थितिज ऊर्जा:



ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि यह आकर्षण बल की ऊर्जा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, स्थितिज ऊर्जा अधिक ऋणात्मक होती जाती है।

(B) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

इलेक्ट्रॉन की गति के कारण उसमें गतिज ऊर्जा होती है:



जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, उसकी गति बढ़ती है और गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है।

Hindi Thought by Prabhjot Singh Nagra : 112014862
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