🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
अगर इतना ही सब्र-ए-सुकून इस
इश्क़ में होता,
तो ज़हर-ए-जुदाई किसी ने भी
चखा नहीं होता,
सँभल जाते हम भी वक़्त की
आहट को सुन कर,
अगर तुमने भी आँखों में पर्दा
रखा नहीं होता,
ये जो बिखरे पड़े हैं, काग़ज़ों पे
लहू के कतरे,
कलम में दर्द कोई भी इतना
तीखा नहीं होता,
मज़ा तो तब था कि तुम साथ
चलते मंज़िलों तक,
सिर्फ़ यादों का साथ हमने ही
चखा नहीं होता,
बड़े सलीके से तुमने किया है कत्ल-
ए-तम्मना,
वरना हमने भी मौत का ये मंज़र
देखा नहीं होता,
शायरी तो बस एक बहाना है
दुनिया को बताने का,
कि अगर तुम वफ़ा करते तो हमने
भी कुछ लिखा नहीं होता…🔥
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#Zakhmi -e-zubani..✍🏼
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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