कहां वो सच्चा संविधान हैं ...!
जिसके लिए ये जग देता था..!
विश्व गुरु का मान हैं ...!
कहां वो भारत में श्रेष्ठ कर्म की विधि-विधान ..!
यहां तो बस लिंग-भेद पर होता सदा पक्षपात हैं !
मुखौटा लगाए घूम रहे हैं ...
यहां स्वत: ही कंस-दुशासन का राज हैं !
सम्मान नारियों का यह झूठी अफ़वाह हैं !
बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ ... !
यह एक छल और आडंबर हैं !
हक़ की बात जहां आए ,
पुरुष प्रधान यह स्वर्णित हो जाएं !
अब भी कहते हो , गणतंत्र दिवस मनाएंगे ...!
और उनकी नीतियों की अवहेलना हर बार कर जाएंगे !
आओ नया संविधान बनाएं ...
सदाचार और सद्विचार का आगाज़ फैलाएं ...!
जहां हर नारी भारत माता हो ....
और सम्मान का अधिकारी हो ...!
तब होगा सच्चा गणतंत्र दिवस ...
तब सच्चा गणतंत्र दिवस ....!!
स्वरचित : अर्चना सिंह ✍🏻
धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐