✤┈SuNo ┤_★_🦋
ज़ख्मी, हकीकत लिखने बैठे तो
कागज़ जलने लगते हैं,
मेरे लहजे की शिद्दत से, मुकद्दर
ढलने लगते हैं,
तुम्हें आता है हुनर, सिर्फ दिलों
पर नाम लिखने का,?
मगर जब मैं तंज़ करता हूँ, तो
पत्थर पिघलने लगते हैं,
मेरे लफ़्ज़ों में वो ज़हर है, जो
रूह को भी काट दे,
सुनें जब चीख मेरी कलम की
तो मंज़र बदलने लगते हैं,
गया वो वक़्त, जब शायर सिर्फ
ख़्वाब बुनते थे,
ज़ख्मी के महफ़िल में तो, अब
मुर्दा जमीर भी चलने लगते हैं,
संभल कर तू भी रहना, ऐ
मोहब्बत पर लिखने वाले,
वरना मैं वो हूँ, जिसके ज़िक्र से
अफ़साने जलने लगते हैं…🔥
╭─❀🥺⊰╯
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#LoVeAaShiQ_SinGh 😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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