नये दौर की चाह में, क्यों पुरानी नींव को भूल गये?
लिबास बदले मगर क्यों हम, अपनी तहजीब को भूल गये?
मॉडर्न होना जिस्म की नुमाइश का नाम नहीं होता,
संस्कारों को छोड़ देना, कोई बड़ा काम नहीं होता।
असली मॉडर्न वो है, जिसके ख्याल नये और नेक हों,
भीड़ में भी खड़े हों तो, अपने किरदार से एक हों।
कपड़ों से नहीं, अपने लहज़े से अपनी पहचान बनाइये,
मगर उसमें अपने पूर्वजों की, थोड़ी झलक भी दिखाइये।
ये धरती है उनकी, जहाँ मर्यादा ही सबसे बड़ा गहना है,
हर रंग में ढल कर भी, हमें भारतीय ही रहना है।
विदेशी चमक-धमक में, क्यों अपनी रूह को खोना?
संस्कृति को साथ रखना ही है, असली 'मॉडर्न' होना।
सुंदर बनो पर इतना नहीं, कि सादगी ही खो जाये,
आगे बढ़ो पर ऐसे नहीं, कि पीछे का रास्ता भूल जाये।
गर्व से पहनो नये लिबास, पर संस्कारों की चादर मत उतारो,
अपनी विरासत से ही तुम, इस नये दौर को संवारो।