“सिर्फ तुम्हारे लिए” — राधा की ओर से कृष्ण को पत्र
सिर्फ तुम्हारे लिए, श्याम,
मैंने अपनी पहचान भुला दी है,
अब लोग मुझे राधा नहीं कहते,
कहते हैं — कृष्ण की दीवानी।
सिर्फ तुम्हारे लिए, मुरलीधर,
मैंने लोक-लाज को आँचल में बाँधा है,
क्योंकि प्रेम जब तुम्हारा हो जाए,
तो संसार छोटा पड़ जाता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, नंदलाल,
मैंने हर श्वास को रास बना लिया है,
तुम पास न भी हो,
तो भी तुम्हारी उपस्थिति में जीना सीख लिया है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, श्यामसुंदर,
मैंने विरह को भी वरदान माना है,
क्योंकि तुम्हारी यादों में जलकर
ही तो प्रेम कुंदन बनता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, मोहन,
मैंने आँसुओं से भी श्रृंगार किया है,
क्योंकि तुमने सिखाया —
सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, अर्पण होता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, केशव,
मैंने हर शिकायत को मुस्कान में ढाला है,
तुम जहाँ हो, वही मेरा धाम है,
वृंदावन अब हृदय में बसा लिया है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, कान्हा,
मैंने खुद को ही तुम्हारा नाम कर दिया है,
अब राधा अलग नहीं रही,
तुम में मिलकर ही तो पूरी हुई है।
लोग कहते हैं — प्रेम में दूरी होती है,
पर उन्हें क्या पता श्याम,
तुम मुझसे दूर होकर भी
मेरी हर धड़कन में बसते हो।
और अगर जन्मों का फेर फिर आए,
तो मैं फिर राधा बन जाऊँगी,
किसी वरदान की इच्छा नहीं,
बस तुम्हें फिर से चाहूँगी। 💙🦚
क्योंकि संसार में सब कुछ बदला जा सकता है,
पर मेरा प्रेम नहीं —
वो तो हर जन्म में वही रहेगा,
सिर्फ तुम्हारे लिए, कृष्ण। 🌸