लगा लो बंदिशें फिर से हम पर
दोहरा दो वही रिवाज पुरानी
दे दो सौगात में हमें फिर से नई बता कर
घूंघट, पर्दा और चार दिवारी
लेट जाने दो जलती चिता पर, हो जाने तो सती हमें
ताकि कोई कर न सके अपनी मनमानी,,,,,,,
नर्क से अच्छा , मार दो मां के गर्भ में हमें
कोई जिल्लत न सहना पड़े इस जमाने की
रूह कांप उठती है हमारी खुद को पाकर सुनसान सड़कों पर
हर रोज नई सुर्खियां बटोर रही है
एक मासूम लड़की की इज्जत की कहानी ,,,,,,,,
बलात्कार शब्द दिल झकझोर देता है
आंखों में आ जाती है डर की निशानी
कल उन दरिंदों का शिकार मै तो नहीं
रहने दो बस अब रहने दो महफूज हमें यहां
लगा लो बंदिशें फिर से हम पर
दोहरा दो वही रिवाज पुरानी ,,,,,,,,,
_Manshi K