हर बात को संभालने की आदत सी पडी है।...
सबकुछ ठीक करने की बीमारी जो लगी है।...
क्या हुवा अगर कुछ सही न हो सका।...
क्या हुवा अगर कुछ संभल न सका।...
हम क्यों फिकर करे जिसकी वजह हम नही।...
हम क्यों वो साहिल बने जिसकी लहर हम नही।...
कितना भी गलत हमे लगे वो सही करने ही बैठा है।
बस एक उसकी आरजू करे जो सबकुछ संभाले बैठा है।...
-Tru...